एक और मौका उन महिलाओं के लिए जिन्हें पहले पढ़ने का अवसर नहीं मिला

Women learning
तस्वीर: प्रीया नरेश और अनिकेत कोलार्कर

क्या आपको पता है कि अभी भी लगभग 500 मिलियन महिलाएं अनपढ़ हैं? इस विचारधारा को तोड़ने के लिए बीएचपी फाउंडेशन के साथ साझेदारी में यूएन वुमेन ने महिलाओं के लिए उनके शिक्षण में आई कमी को पूरा करने एवं उन्हें कमाई और नेतृत्व के अवसरों से जोड़ने के लिए वैश्विक स्तर पर दूसरे मौके के लिए मॉडल तैयार किया है।

सेकन्ड चांस वेबसाइट के माद्यम से आप हमारे साथ महिलाओं को समर्थ बनाने, सीखने, आमदनी करने और नेतृत्व करने के सफर में जुड़ सकते हैं।

सेकन्ड चांस कार्यक्रम सुनिश्चित करता है कि महिलाओं की शिक्षा स्थानीय कमाई के अवसरों से जुड़ी हो, उन्हें नौकरी खोजने या अपना खुद का व्यवसाय स्थापित करने में मदद करती हो। इस प्रकार यह कार्यक्रम उन्हें आर्थिक रूप से समर्थ बनाता है।

यह कार्यक्रम महिलाओं के परिवारों और समुदायों के दृष्टिकोण और सामाजिक मानदंडों में परिवर्तन लाने पर भी काम करता है।

लर्निंग ईक्वॉलिटी के साथ साझेदारी और उनके शिक्षण प्लैटफॉर्म कोलिब्री के बदौलत पढ़ाई की सामग्री ऑफलाइन तथा ऑनलाइन, दोनो ही माध्यमों से प्राप्त की जा सकती है। कोलिब्री विशेष रूप से कम संसाधन वाले वातावरणों के लिए बनाया गया है।

स्थानीय स्तर के समाधानों के साथ वैश्विक कार्यक्रम

सेकन्ड चांस एजुकेशन एंड वोकेशनल ट्रेनिंग कार्यक्रम (2018-2021) दुनिया की कुछ सबसे वंचित युवा महिलाओं के लिए आशा की किरण है -वो महिलाएं जिन्हें पढ़ने का मौका नहीं मिला और जिनके पीछे छूट जाने का खतरा है।

इस कार्यक्रम को ऑस्ट्रेलिया, कैमरून, चिली, भारत, जॉर्डन और मैक्सिको में चलाया जा रहा है, जिससे स्वदेशी, शरणार्थी, विस्थापित और कम आय वाले वर्गों की 67,000 युवा महिलाओं को सीधा लाभ मिला है।

स्थानीय संस्थाओं के ज़रिए, सेकन्ड चांस कार्यक्रम सीखनेवाले और अर्जक के रूप में महिलाओं की आवश्यकताओं को पूरा करने में समर्थन करता है।

यह महिलाओं को वापस ऑपचारिक शिक्षा प्राप्त करने, व्यवहारिक कौशल और उद्यमिता में आमने-सामने बैठ कर प्रशिक्षण देता है और स्वतंत्र रूप से शिक्षण प्राप्त करने के लिए समर्थन देता है।

ऑनलाइन और व्यक्तिगत तौर पर शिक्षण

Women in India
तस्वीर: प्रीया नरेश और अनिकेत कोलार्कर

महामारी से पहले इन छः देशों में कई महिलाओं ने महिला सशक्तिकरण केंद्रों में नामांकन करा लिया था। इन केंद्रों में सेकन्ड चांस कार्यान्वयन साझेदार के सहायक महिलाओं को मार्गदर्शन और समर्थन करते हैं।  महिलाओं को प्रशिक्षित किया जाता है और वे शिक्षण प्लैटफॉर्म कोलिब्री का प्रयोग कर सकती हैं जिसे ऑफलाइन काम करने के लिए सेट अप किया जा सकता है। इस वेबसाइट के माध्यम से भी कोलिब्री का अभिगम किया जा सकता है। 

महामारी के दौरान, केंद्र में कराई जाने वाले अधिकतर प्रशिक्षण ऑनलाइन कराए जाने लगे, जिसे महिलाएं घर पर रहते हुए फोन और एक इंटर्नेट कनेक्शन के ज़रिए सीखना जारी रख सकीं।महामारी के दौरान भी सहायकों ने महिलाओं को उनके शिक्षण में सुदूर अभिगम के माध्यम से समर्थन करना जारी रखा है।

महिलाओं द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली डिजिटल शिक्षण सामग्री दो स्रोतों से प्राप्त किए जाते हैं: मौजूदा उपलब्ध सामग्री और स्तानीय साझेदारों द्वारा तैयार की गई शिक्षण सामग्री। वैश्विक स्तर पर सभी के लिए उपलब्ध सामग्री हालांकि सबके द्वारा देखी जा सकती है और अक्सर उत्तम गुणवत्ता की होती है लेकिन सेकन्ड चांस के प्रतिभागियों के लिए उपयुक्त नहीं होती क्योंकि यह उनकी संस्कृति, समाज या आर्थिक प्रसंग से कोई नाता नहीं रखती और उच्च शिक्षा प्राप्त लोगों के लिए लक्षित होती है।

प्रत्यक्ष रूप से इन महिलाओं के साथ काम करने वाले स्थानीय साझेदारों द्वारा तैयार किया गई प्रशिक्षण सामग्री काफी ज्यादा लोकप्रिय हो रही है। यह उन महिलाओं की आवश्यक्ताओं के अनुसार तैयार किया गया है, उनके अनुरूप है और उनसे संबधित है।

महिलाओं में निवेश करना आर्थिक रूप से समझदारी का निर्णय है

"three happy women"
तस्वीर: प्रीया नरेश और अनिकेत कोलार्कर

शिक्षित महिलाओं की ज्यादा स्वस्थ रहने की, अधिक आमदनी करने की तथा परिवार में निर्णय लेने की अधिक क्षमता होने की संभावना रहती है। महिला शिक्षा में बढ़त राष्ट्रीय आर्थिक विकास में बढ़ोतरी से जुड़ी है। सच में महिलाओं में निवेश करना आर्थिक रूप से समझदारी का निर्णय है।

इसके बावजूद 2014 में केवल 46 प्रतिशत देशों ने निम्न माध्यमिक शिक्षा में लैंगिक समानता और उच्च माध्यमिक शिक्षा में 23 प्रतिशत देशों ने लैंगिक समानता प्राप्त की है। पीढ़ियों से लड़कियों और युवा महिलाओं को मौलिक शिक्षा प्राप्त करने के अवसरों से वंचित रखा जा रहा है जो न केवल उनके लिए बल्कि उनके देशों और समुदायों के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।

महिलाओं को शिक्षा, प्रशिक्षण और आय करने में समर्थन देने से न केवल वे समर्थ होती है बल्कि वे दीर्घकालिक आर्थिक प्रगति और विकास में भी योगदान देती हैं।

उन युवा महिलाओं के लिए समाधान निकालने की तत्काल जरूरत है जिन्हें शिक्षा प्राप्त करने से वंचित रखा गया है और उन्हें काम के अच्छे अवसर नहीं उपलब्ध कराए गए।

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Smiling woman in India
तस्वीर: प्रीया नरेश और अनिकेत कोलार्कर
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स्रोतः

लगभग 500 मिलियन निरक्षर महिलाएँ: http://uis.unesco.org/sites/default/files/documents/fs45-literacy-rates-continue-rise-generation-to-next-en-2017_0.pdf

माध्यमिक शिक्षा में लैंगिक समानता: https://unesdoc.unesco.org/ark:/48223/pf0000246045